राजनीति में गुर्जर समाज का प्रतिनिधि बढ़ाने वाले पहले नेता कौन? जानिए पॉलिटिकल डेस्क- भारत की राजनीति में जातियों का बड़ा महत्व होता है।

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राजनीति में गुर्जर समाज का प्रतिनिधि बढ़ाने वाले पहले नेता कौन? जानिए पॉलिटिकल डेस्क- भारत की राजनीति में जातियों का बड़ा महत्व होता है। क्योंकि देश में कई जातियां अघैड़ी है, तो वही कई जातियां पिछड़ी है। ऐसे में इन जातियों की विभिन्न मांगों उठाने के लिए इनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व होना बेहद जरूरी होता है।

राजस्थान में गुर्जर मतदाताओं की संख्या को खासी है मुख्यतः पूर्वी राजस्थान,हाडोती,ढूंढाड इन इलाकों में गुर्जर बहुल कई सीटें है। लेकिन भारत के आजादी के बाद से इस समाज के पास अपनी आवाज उठाने वाला कोई बड़ा नेता नहीं था। खास करके राजस्थान में नहीं था। ऐसे में यायावर और घुमंतू समाज पिछड़ता चला गया। इसलिए इस समाज को अपने एक प्रभावशाली नेता जरूरत थी।


साठ का दशक आते-आते पूर्वी राजस्थान में गुर्जर समुदाय के एक विशाल जनाधार के जन नेता का उदय हुआ जो मोहनलाल सुखाड़िया सरकार मंत्री बने पहली बार विधायक बनकर जाते ही। अपने विधानसभा क्षेत्र के  कामों के साथ लगातार पूरे राजस्थान में  समाज में जन जागरण किया। पहली बार गुर्जर आरक्षण की मांग भी शिव चरण सिंह धाभाई ने उठाई और राजनीतिक प्रतिनिधि को बढ़ाने के लिए लगातार नए नेताओं की फौज तैयार करने में जुटे रहे।


आप शिव चरण सिंह धाभाई के एक जन नेता होने की बात को समझ सकते है, की महुआ से पहला चुनाव लड़ा कांग्रेस के टिकट जीते और मोहनलाल सुखाड़िया सरकार में मंत्री बने।अगला चुनाव में उन्होंने निर्दलीय पर्चा भरा भरतपुर के बयाना से और विधायक बने।भैरो सिंह शेखावत सरकार कैबिनेट मंत्री बनाए गए।साल 1985 में अगला चुनाव करौली से लड़े और जीत दर्ज की साल 1992 में राज्यसभा सदस्य चुने का खास बात यह है अपने समुदाय से राज्यसभा जाने वाली वह पहले नेता है।

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