कोरोना काल में बदली बच्चों की दिनचर्या और आदतें, देखिए मि. रिपोर्टर की खास रिपोर्ट

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कोरोना का संकट जल्द खत्म होने वाला हो ऐसा लगता तो नहीं है, क्योंकि जिस हिसाब से कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ रही हैं उसको देखकर तो लगता है कि अब हमें इस संकट के साथ जीना सीखना होगा। कोरोना संक्रमण ने मासूम बच्चों की दिनचर्या और खाने पीने की आदतों को बदल दिया है। जहां पहले बच्चें मैदान में दौड़ते भागते नजर आते थे। वहीं अब बच्चे कम्प्यूटर-मोबाईल पर कार्टून कैरेक्टरों को दौड़ाते नजर आते है।   ये मासूम सी बच्ची जिसने अभी ठीक से बोलना भी नहीं सीखा है,उसने मोबाईल चलाना है और मोबाईल पर दिखने वाले कार्टून कैरेक्टरों से ऐसी दोस्ती करना सीख लिया है, कि उसे लगता है ये वर्चूअल दोस्त ही उसके असली दोस्त है और ठीक उसी तरह जैसे कोई दोस्त दूर होता है तो रोना आ जाता है, वैसी ही अगर इस बच्ची से मोबाईल वापस लिया जाएं तो ये भी रोना शुरु कर देती है। कोरोना काल में लगभग हर घर में ऐसी ही तस्वीर देखने को मिली हैं। बदलती हुई आदतों को लेकर वर्षा खेरा ने कहा कि क्या करें, बच्चे रोते भी तो अच्छे नहीं लगते है।   मध्यप्रदेश में कोरोना संकट फैल तो रहा है लेकिन उसके फैलने की रफ्तार उनती ज्यादा तेज नहीं जितनी देश की राजधानी दिल्ली की है। दिल्ली में कोरोना सबसे ज्यादा तेजी से फैल रहा है। यहीं कारण कि दूसरे राज्यों से आकर दिल्ली में बसने वाले लोग अपने घरों की ओर वापस जा रहे है। दिल्ली से अपनी बेटी रितवी को लेकर वापस भोपाल लौटी शिल्पी ने बताया कि वहां घर छोटे-छोटे होते है, बच्चों के पास खेलने की जगह नहीं थी, कोरोना का डर ज्यादा था, इसलिए वापस भोपाल आएं हैं।


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